मणप्पुरम के महादेव: पिता के बिना पहली शिवरात्रि 🙏 | आलुवा शिवरात्रि की कथा
महाशिवरात्रि की रात। केरल की पेरियार नदी के रेतीले तट पर हज़ारों दीये। उस भीड़ में, अपने स्वर्गवासी पिता का छाता लिए गौरी — पिता के कंधों पर बैठकर देखी शिवरात्रियों की याद में।
आलुवा के महादेव पर कोई छत नहीं। परशुराम का बनाया मंदिर बाढ़ बहा ले गई; शिव के गणों ने एक ही रात में मंदिर बनाना शुरू किया, पर भोर से पहले मुर्गे के बोलते ही काम अधूरा रह गया — कथा है कि वह मुर्गा स्वयं भगवान विष्णु थे। मान्यता है कि इसी नदी-तट पर श्रीराम ने जटायु का तर्पण किया था।
शिवरात्रि की पूरी रात जागकर, भोर में पेरियार में अपने पितरों का तर्पण करते हज़ारों लोग। प्रेम मरता नहीं; वह नदी की तरह बहता रहता है।
📖 कथा: त्रिशूर की शांताकुमारी से सुनी हुई
🎬 Made by Santosh Roy
🔔 नई पौराणिक कथाओं के लिए @ShankhaAmrit को सब्सक्राइब करें और बेल आइकन दबाएँ।
यह वीडियो लोक-मान्यताओं और पारंपरिक कथाओं पर आधारित है।
यह कथा मलयालम में भी: മണപ്പുറത്തെ മഹാദേവൻ: അച്ഛനില്ലാത്ത ആദ്യ ശിവരാത്രി 🙏