माँ का नन्हा कान्हा 🙏 | कुरूरम्मा | जिसने भगवान को बेटे-सा प्यार किया | गुरुवायूर कथा
"उण्णी, भात ठंडा हो जाएगा… आ जा।" — कुरूर मना की वह बूढ़ी माँ रोज़ यूँ ही पुकारतीं। निःसंतान विधवा कुरूरम्मा ने गुरुवायूरप्पन को अपना बेटा बना लिया।
बारिश की रात राह दिखाने वाला ग्वाला बालक, भगवान की कमर पर मिला वस्त्र का टुकड़ा, आँगन बुहारता और मक्खन चुराता उण्णी, और विल्वमंगलम स्वामियार का मौन शंख — यह सब मान्यताओं पर आधारित है।
माँ को अपने बेटे को पहचानने के लिए नाम नहीं चाहिए — बस प्रेम काफ़ी है।
📖 कथा: त्रिशूर की शांताकुमारी से सुनी हुई
🎬 Made by Santosh Roy
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यह वीडियो लोक-मान्यताओं और पारंपरिक कथाओं पर आधारित है।
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