त्रिशूर पूरम: एक राजा का जवाब 🐘 | केरल के सबसे भव्य उत्सव की कथा
बारिश में देर से पहुँचने पर आराट्टुपुझा के उत्सव से लौटा दिए गए त्रिशूर के मंदिर। उनके लिए कोचीन के महाराजा शक्तन तंपुरान का जवाब था त्रिशूर पूरम — भगवान शिव के वडक्कुन्नाथन मंदिर के सामने, अपने ही शहर में एक भव्य उत्सव।
तिरुवम्बाडी और पारमेक्कावु — दो पक्षों की दोस्ताना होड़। बकुल (इलंजी) वृक्ष के नीचे दो सौ से ज़्यादा कलाकारों का भव्य ढोल-वादन, तेक्किंकाडु मैदान में आमने-सामने खड़े सजे हुए हाथी और रंग-बिरंगे छत्रों की अदला-बदली, भोर में आतिशबाज़ी, और अगले दिन अगले बरस फिर मिलने के वचन के साथ विदाई।
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यह वीडियो लोक-मान्यताओं, पारंपरिक कथाओं और ऐतिहासिक परंपरा पर आधारित है।
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