आराट्टुपुझा पूरम: जहाँ देवता एक साथ आते हैं 🐘 | केरल का सबसे पुराना उत्सव
मान्यता है कि मार्च-अप्रैल की एक रात केरल के देवी-देवता त्रिशूर के पास आराट्टुपुझा के एक खेत में इकट्ठा होते हैं — देवताओं का यह मेला केरल के सभी मंदिर-उत्सवों की जननी कहलाता है।
मेज़बान हैं आराट्टुपुझा मंदिर के देवता धर्मशास्ता, यानी भगवान अय्यप्पा, जिनमें श्रीराम के गुरु महर्षि वसिष्ठ का तेज माना जाता है। इसलिए, जैसे शिष्य अपने गुरु से मिलने आए, त्रिप्रयार के भगवान श्रीराम इस उत्सव में पधारते हैं। ढोल-नगाड़ों का भव्य वादन, मशालें, सजे हुए हाथी, और भोर में नदी में पवित्र स्नान।
1796 में बारिश से देर से पहुँचे त्रिशूर के मंदिरों को प्रवेश नहीं मिला, तब कोचीन के महाराजा शक्तन तंपुरान ने त्रिशूर पूरम शुरू किया — पर वह एक और कथा है।
📖 कथा: जैसी श्रीमती शांता कुमारी ने सुनाई
🎬 Made by Santosh Roy
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यह वीडियो लोक-मान्यताओं और पारंपरिक कथाओं पर आधारित है।
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