गुरु की दक्षिणा: नारायणीयम् की कथा 🙏 | गुरुवायूर का चमत्कार
गुरु का दर्द न देख पाने वाला एक शिष्य, जिसने उनका रोग अपने ऊपर ले लिया — मेल्पत्तूर नारायण भट्टतिरि। अकड़े शरीर के साथ जब वह गुरुवायूरप्पन के सामने पहुँचा, तो महाकवि तुंचत्तु एषुत्तच्छन ने कहा: 'मछली से शुरू करो।'
भगवान के पहले अवतार मत्स्य से शुरू करके, सौ दिन, हर दिन दस श्लोक — एक हज़ार से ज़्यादा श्लोकों का ग्रंथ, नारायणीयम्। मान्यता है कि सौवें दिन उसे भगवान के दर्शन हुए और वह रोग से मुक्त हो गया। आज भी गुरुवायूर में हर साल नारायणीयम् दिवस मनाया जाता है।
गुरु के लिए उठाया गया दर्द, एक ऐसा गीत बन गया जिसे भगवान ने स्वयं सुना।
📖 कथा: त्रिशूर की शांताकुमारी से सुनी हुई
🎬 Made by Santosh Roy
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यह वीडियो लोक-मान्यताओं और पारंपरिक कथाओं पर आधारित है।
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